डेंगू पर रोक के लिए सम्पूर्ण प्रशासनिक तंत्र सजग एवं तत्पर: डीएम

पटना. जिलाधिकारी, पटना डॉ. चन्द्रशेखर सिंह द्वारा आज डेंगू नियंत्रण हेतु किए जा रहे कार्रवाईयों की समीक्षा की गई तथा अद्यतन स्थिति का जायजा लिया गया। उन्होंने सिविल सर्जन, पटना; अनुमंडल पदाधिकारियों तथा नगर कार्यपालक पदाधिकारियों को निर्धारित मानकों के अनुसार हर तरह का निरोधात्मक एवं सतर्कतामूलक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निदेश दिया। अधिकारियों को बड़े-बड़े अपार्टमेंट्स सहित सभी सोसायटीज़ में जागरूकता अभियान चलाने का निदेश दिया गया। डेंगू एवं चिकनगुनिया के नियंत्रण हेतु मच्छरों की रोकथाम के लिए सभी नगर अंचलों में नगर कार्यपालक पदाधिकारियों को नियमित रूप से फागिंग एवं एंटी लार्वा टेमीफॉस का छिड़काव करने का निदेश दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को टेक्निकल मैलाथियोन का छिड़काव कराने का निदेश दिया गया है।

जिलाधिकारी ने कहा कि डेंगू के मामले में जो वृद्धि हो रही है उसमें पैनिक होने की कोई आवश्यकता नहीं है। डेंगू पर रोक के लिए सम्पूर्ण प्रशासनिक तंत्र सजग एवं तत्पर है। बरसात के मौसम में डेंगू एवं चिकनगुनिया का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है। विगत 24 घंटे में डेंगू पॉजिटिव मरीजों की संख्या 70 है जिसमें 47 सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय/अस्पताल में पॉजिटिव मरीजों की संख्या है तथा 23 निजी अस्पताल/लैब में पॉजिटिव मरीजों की संख्या है। विभिन्न अस्पतालों में भर्ती मरीजों की कुल संख्या 46 है जिसमें पीएमसीएच में 04, एनएमसीएच में 16 तथा विभिन्न निजी अस्पतालों में 26 मरीज भर्ती हैं। 01 जनवरी, 2024 से 19 सितम्बर, 2024 तक डेंगू के कुल मरीजों की संख्या 909 है। स्वस्थ हुए रोगियों की संख्या 554 है। अभी तक डेंगू से 03 मरीजों की मृत्यु हुई है जिसमें पीएमसीएच में 02 तथा एनएमसीएच में 01 रोगी की मृत्यु हुई है।

जिलाधिकारी ने कहा कि डेंगू के ट्रेंड के बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों एवं एक्सपर्ट्स द्वारा बताया गया है कि वर्ष 2022 एवं 2019 में भी इसी तरह डेंगू के मामले बढ़ रहे थे, परन्तु इस वर्ष डेंगू से पीड़ित मरीजों में रिकॉवरी रेट अच्छा है। अस्पताल में भर्ती होने की भी कम आवश्यकता पड़ रही है। जो भर्ती हो भी रहे हैं वे जल्द ही ठीक भी हो जा रहे हैं। प्रायः डेंगू का उपचार सामान्य विधि से होता है। इसके लिए पारासिटामोल सुरक्षित दवा है। *सामान्यतः एक सप्ताह में रोगी डेंगू संक्रमण से स्वस्थ हो जाते हैं*। कम ही मरीजों को प्लेटलेट्स की आवश्यकता पड़ रही है। एक्सपर्टस ने बताया है कि मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या 10 हजार से कम होने अथवा रक्तश्राव के लक्षण दिखने पर ही विशेष परिस्थिति में प्लेटेलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। अतः लोगों को घबराने की एकदम आवश्यकता नहीं है।

जिलाधिकारी ने कहा कि *स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा यह भी बताया गया है कि दीपावली तक डेंगू की यही स्थिति रहने की संभावना है। दीपावली के पश्चात स्थिति में सुधार आएगा*।

डीएम डॉ. सिंह ने कहा कि अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में बेड उपलब्ध है। पीएमसीएच में 08 बेड रिजर्व है जबकि 04 रोगी भर्ती हैं। एनएमसीएच में 55 बेड रिजर्व है एवं 16 मरीज भर्ती हैं। गुरू गोविंद सिंह सदर अस्पताल में 10 बेड, हरएक अनुमंडल अस्पताल में 05-05 बेड तथा प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में 02-02 रिजर्व है। जिलाधिकारी ने कहा कि जरूरत के अनुसार अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ायी जाएगी। प्राईवेट अस्पताल के चिकित्सकों ने भी यह बताया है कि उनके यहाँ पर्याप्त मात्रा में बेड की उपलब्धता है। *आईसोलेटेड वार्ड की कोई आवश्यकता* नहीं है। लगभग 25 प्रतिशत बेड डेंगू मरीजों के लिए उपयोग हो रहा है। आवश्यकता पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जाएगा। किसी भी मरीज को लौटाया नहीं जा रहा है। डीएम डॉ. सिंह ने कहा कि जिला में ब्लड बैंक अलर्ट पर है। प्लेटलेट्स की कोई कमी नहीं है, मरीजों को असुविधा नहीं होगी।

डीएम डॉ. सिंह के निदेश पर सिविल सर्जन द्वारा 24*7 डेंगू नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है। इसमें तीन पालियों में कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। दूरभाष संख्या 0612-2249964 पर आम जनता किसी भी सहायता के लिए सम्पर्क कर सकती है। हॉस्पिटलाईजेशन, बेड की उपलब्धता, ब्लड की आवश्यकता, ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की उपलब्धता आदि से संबंधित जानकारी इसपर प्राप्त की जा सकती है। डीएम डॉ. सिंह के निदेश पर नियंत्रण कक्ष में पंजी का संधारण किया जा रहा है जिसमें सभी सूचनाओं को अंकित करते हुए आम जनता को सभी सहायता उपलब्ध करायी जाएगी।

डीएम डॉ सिंह ने कहा कि डेंगू से बचाव हेतु *जन-सहभागिता* आवश्यक है। आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं पंचायती राज प्रतिनिधियों की बैठक में नियमित कार्रवाई की जाए। आम जनता में डेंगू बुखार के बारे में जागरूकता अभियान के तहत आशा, ए.एन.एम. तथा जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर चर्चा एवं गोष्ठी का आयोजन करने का निदेश दिया गया है।

डीएम डॉ. सिंह ने कहा कि डेंगू संक्रमण के प्रबंधन में प्लेटलेट्स की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु ब्लड बैंक कोषांग क्रियाशील है। साथ ही प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के निदेशक/अधीक्षक एवं ब्लड बैंक हेतु नोडल पदाधिकारियों से समन्वय के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों को लगाया गया है।

प्रतिनियुक्त स्वास्थ्य अधिकारी एवं नोडल चिकित्सा पदाधिकारी का कर्तव्य एवं दायित्वः-

1. यह सुनिश्चित करेंगे कि संबंधित ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स/ब्लड की निर्बाध उपलब्धता हो।

2. प्राथमिकता के आधार रोगियों की स्थिति की गंभीरता का आकलन करते हुए ब्लड/प्लेटलेट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करायेंगे।

3. यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी रोगी एवं उनके परिजन से अवैध राशि की वसूली न हो।

4. दलालों एवं बिचौलियों पर लगातार नजर रखना।

5. ब्लड/प्लेटलेट्स की अनुपलब्धता की स्थिति में तत्काल सूचित करना।

6. सभी ब्लड बैंकों द्वारा यह सुनिश्चित कराया जाय कि ई-रक्त कोष पोर्टल पर ब्लड/प्लेटलेटस की उपलब्धता प्रतिदिन पोर्टल पर अपडेट किया जाय।

डीएम डॉ. सिंह द्वारा अधिकारियों को निदेश दिया गया है किः-

1. सभी संबंधित पदाधिकारी सजग रहें तथा डेंगू पर नियंत्रण के लिए हरसंभव कदम उठाएँ।

2. डेंगू के संभावित हॉट स्पॉट पर विशेष नजर रखते हुए त्वरित कार्रवाई करें।

3. अन्य राज्यों में भी डेंगू के मरीज मिल रहे हैं। आने वाले त्योहारों के दौरान काफी बड़ी संख्या में लोगों के बिहार आने की संभावना है। अतः सभी अनुमंडल पदाधिकारियों, सिविल सर्जन, नगर कार्यपालक पदाधिकारियों तथा अन्य सम्बद्ध विभागों के पदाधिकारियों को अपेक्षित सतर्कता बरतने की जरूरत है।

4. एडिज मच्छर पर नियंत्रण के लिए हर तरह की निरोधात्मक कार्रवाई करें। वृहत स्तर पर फॉगिंग तथा एन्टी-लार्वा रसायन (टेमीफॉस) का छिड़काव करें।

5. स्वास्थ्य प्रशिक्षकों द्वारा नगर निकायों में फॉगिंग का निरंतर पर्यवेक्षण सुनिश्चित कराएँ।

6. डेंगू को नियंत्रित करने के लिए संदिग्ध मरीजों की निगरानी रखना आवश्यक है। डेंगू की पुष्टि होने पर मरीज के घरों के आस-पास आशा तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से एक्टिव सर्विलेंस कराएँ ताकि नये मरीजों की पहचान हो सके।

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