
पटना: पिछले एक दशक से अधिक समय से ‘सिनर्जी’ एक ऐसा मंच बन गया है जहाँ छात्र-छात्राएँ केवल अपनी प्रतिभा ही नहीं बल्कि अपने मूल्यों और भविष्य की योजनाएं भी भी प्रस्तुत प्रस्तुत करते करते हैं। इस वर्ष का विषय था “नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व” । इस अवसर का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह प्रेरणा देना था कि वे संवेदनशीलता, ईमानदारी और साहस के साथ नेतृत्व करें और यह समझें कि नेतृत्व कोई पद नहीं बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व है।
आज जब विश्व अभूतपूर्व परिवर्तनों और चुनौतियों से गुजर रहा है, ‘सिनर्जी 2025’ का ध्येय ऐसे युवा नेताओं को तैयार करना था जो यह समझें कि सच्ची प्रगति शक्ति से नहीं, बल्कि उद्देश्य से आती है। विद्यार्थियों को व्यक्तिगत उपलब्धियों से आगे बढ़कर परिवर्तनकारी भूमिका निभाने और अपने विद्यालय, समुदाय तथा समाज के व्यापक हित में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

उद्घाटन समारोह में सभी प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन किया गया तथा विद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष, स्वर्गीय अजीत सिंह (पूर्व सांसद, आरा) को पुष्पांजलि अर्पित की गई। सांस्कृतिक कार्यक्रम में समूह नृत्य तथा विद्यालय के गायन दल द्वारा हिंदी और अंग्रेज़ी गीतों की प्रस्तुति हुई। समारोह में विद्यालय के संरक्षक विशाल सिंह तथा अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। निर्णायक मंडल में प्रख्यात लोक गायिका लक्ष्मी मिश्रा, प्रसिद्ध चित्रकार सोमा आनंद, कलाकार एवं ‘जानो जंक्शन’ के संस्थापक क्षितिज चौधरी, पूर्व रेडियो उद्घोषक अपूर्व, फिल्म निर्माता उज्ज्वल श्रीवास्तव, युवा उद्यमी, नृत्य कोरियोग्राफर राजेश एवं कंटेंट क्रिएटर सुश्री शौर्या प्रभाकर सम्मिलित हुए।
विद्यालय की प्राचार्या मनीषा सिन्हा ने अपने स्वागत भाषण में कहा “नेतृत्व पदों से नहीं बल्कि उत्तरदायित्व ग्रहण करने के साहस से परिभाषित होता है। रेडिएंट में, हम मानते ानते हैं कि प्रत्येक विद्यार्थी में नेतृत्व की क्षमता है, जो दूसरों को ऊपर उठाने की प्रेरणा देता है। ‘सिनर्जी’ विद्यार्थियों को अपने विचार प्रकट करने, अपने मूल्यों पर कार्य करने और सामूहिक कल्याण के लिए नेतृत्व करने का अवसर प्रदान करता है।”
दो दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में पटना के इक्कीस प्रमुख विद्यालयों से आए लगभग चार सौ पचास प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिताओं की श्रृंखला में सृजनात्मकता, बुद्धिमत्ता, संस्कृति और नागरिक उत्तरदायित्व का सुंदर संगम देखने को मिला।
लेखन प्रतियोगिता ‘राइटिंग पूल’ में विद्यार्थियों ने कोलाज और नारे प्रस्तुत किए। ‘मेयर योर सिटी’ (विज्ञान मॉडल निर्माण) में विद्यार्थियों ने समावेशी और सतत शिक्षा मॉडल प्रस्तुत किए। ‘दृष्टि आर्ट फॉर एक्शन’ में प्रतिभागियों ने संवेदनशीलता और आशा से भरी चित्रकला प्रस्तुत की। ‘माई पिच’ ने सामाजिक पहल और नवीन विचारों को मंच दिया। नुक्कड़ नाटक ने जागरूकता फैलाने का कार्य किया। ‘बज़िंगा 4.0 प्रश्नोत्तरी’ ने विद्यार्थियों की जानकारी, जागरूकता और नेतृत्व क्षमता की परीक्षा ली। वाद-विवाद प्रतियोगिता में “कौशल बनाम पटकथा” विषय पर गहन और विचारोत्तेजक तर्क प्रस्तुत किए गए। सांस्कृतिक आयाम में लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रतियोगिताओं ने परंपराओं और मूल्यों को पुनर्जीवित किया। ‘हंट-एन-पेकर्स’ जैसी टीम प्रतियोगिता ने नेतृत्व, समस्या समाधान और सहयोग की भावना को उजागर किया। प्रत्येक कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया था कि वह प्रतियोगिता से आगे बढ़कर विद्यार्थियों में रचनात्मकता, सहयोग, समावेशिता और नैतिक निर्णय क्षमता का विकास करे।
यह आयोजन संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों लक्ष्य 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और लक्ष्य 16 (शांति, न्याय एवं सशक्त संस्थाएँ) से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा रहा। इसने यह दर्शाया कि रेडिएंट इंटरनेशनल स्कूल विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक दृष्टि से नहीं बल्कि सहृदय वैश्विक नागरिक बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
समापन अवसर पर विजेताओं को पदक और ट्रॉफी प्रदान किए गए। विद्यालय के संरक्षक विशाल सिंह ने कहा कि “सिनर्जी” विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा और विचार प्रस्तुत करने का एक सार्थक मंच प्रदान करता है। इस महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य के लिए तैयार करना और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना है।”
कार्यक्रम का संचालन इंदरप्रीत कौर और नभनील ने किया। धन्यवाद ज्ञापन में सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और टीम के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
प्रतिभागियों को विशेष स्मृति उपहार दिए गए जिनमें बीज बम, दृष्टि-बाण, पेंसिलयुक्त पुस्तकचिह्न, भविष्य की ओर अग्रसर नौका तथा स्वप्न-बैंड सम्मिलित थे। इन उपहारों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हर लक्ष्य एक बीज की तरह है, जिसे यदि पोषित किया जाए तो वह आपके सपनों का वृक्ष बन सकता है।
‘सिनर्जी- 2025’ केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि विचारों, उत्तरदायित्व और आशा का संगम था। इस आयोजन ने युवा पीढ़ी को करुणा के साथ नेतृत्व करने और भविष्य की बागडोर सँभालने की प्रेरणा दी।