पटना. जिलाधिकारी, पटना डॉ. चन्द्रशेखर सिंह द्वारा डेंगू एवं चिकनगुनिया के प्रसार पर नियंत्रण हेतु की जा रही कार्रवाइयों की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि इन बीमारियों के फैलाव को रोकने के लिए सम्पूर्ण प्रशासनिक तंत्र सजग एवं तत्पर है। जिला प्रशासन द्वारा प्रावधानों के अनुरूप सभी तरह की निरोधात्मक तथा सतर्कतामूलक कार्रवाई की जा रही है। उपचार हेतु भी अस्पतालों में हर प्रकार का प्रबंध है। सिविल सर्जन, पटना, अनुमंडल पदाधिकारियों तथा नगर कार्यपालक पदाधिकारियों को विजिलेंट रहने हेतु निदेशित किया गया है।
जिलाधिकारी ने कहा कि लोगों को पैनिक होने की कोई आवश्यकता नहीं हैं। प्रायः डेंगू का उपचार सामान्य विधि से होता है। इसके लिए पारासिटामोल सुरक्षित दवा है। मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या 10 हजार से कम होने अथवा रक्तश्राव के लक्षण दिखने पर ही विशेष परिस्थिति में प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। प्लेटलेट्स की व्यवस्था भी पर्याप्त मात्रा में है तथा आवश्यकता होने पर रोगियों को उपलब्ध करायी जाएगी।
जिलाधिकारी ने वर्षा के मौसम को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों को भी बड़े-बड़े अपार्टमेंट्स सहित सभी सोसायटीज़ में जागरूकता अभियान चलाने का निदेश दिया गया है।
डीएम डॉ सिंह ने कहा कि डेंगू से बचाव हेतु जन-सहभागिता आवश्यक है। आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं पंचायती राज प्रतिनिधियों की बैठक में नियमित कार्रवाई की जाए। आम जनता में डेंगू बुखार के बारे में जागरूकता अभियान के तहत आशा, ए.एन.एम. तथा जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर चर्चा एवं गोष्ठी का आयोजन करने का निदेश दिया गया है।
जिलाधिकारी द्वारा डेंगू एवं चिकनगुनिया के नियंत्रण हेतु सिविल सर्जन, पटना, अनुमंडल पदाधिकारियों तथा नगर कार्यपालक पदाधिकारियों को निर्धारित मानकों के अनुसार हर तरह का निरोधात्मक एवं सतर्कतामूलक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निदेश दिया गया है। मच्छरों की रोकथाम के लिए सभी नगर अंचलों में नगर कार्यपालक पदाधिकारियों को फागिंग एवं एंटी लार्वा टेमीफॉस का छिड़काव करने का निदेश दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को टेक्निकल मैलाथियोन का छिड़काव कराने का निदेश दिया गया है। डेंगू नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है। इसकी दूरभाष संख्या 0612-2249964 पर आम जनता द्वारा किसी भी सहायता के लिए सम्पर्क किया जा सकता है।
डीएम डॉ. सिंह द्वारा अधिकारियों को निदेश दिया गया है किः-
1. सभी संबंधित पदाधिकारी सजग रहें तथा डेंगू पर नियंत्रण के लिए हरसंभव कदम उठाएँ।
2. डेंगू के संभावित हॉट स्पॉट पर विशेष नजर रखते हुए त्वरित कार्रवाई करें।
3. अन्य राज्यों में भी डेंगू के मरीज मिल रहे हैं। आने वाले त्योहारों के दौरान काफी बड़ी संख्या में लोगों के बिहार आने की संभावना है। अतः सभी अनुमंडल पदाधिकारियों, सिविल सर्जन, नगर कार्यपालक पदाधिकारियों तथा अन्य सम्बद्ध विभागों के पदाधिकारियों को अपेक्षित सतर्कता बरतने की जरूरत है।
4. एडिज मच्छर पर नियंत्रण के लिए हर तरह की निरोधात्मक कार्रवाई करें। वृहत स्तर पर फॉगिंग तथा एन्टी-लार्वा रसायन (टेमीफॉस) का छिड़काव करें।
5. स्वास्थ्य प्रशिक्षकों द्वारा नगर निकायों में फॉगिंग का निरंतर पर्यवेक्षण सुनिश्चित कराएँ।
6. डेंगू को नियंत्रित करने के लिए संदिग्ध मरीजों की निगरानी रखना आवश्यक है। डेंगू की पुष्टि होने पर मरीज के घरों के आस-पास आशा तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से एक्टिव सर्विलेंस कराएँ ताकि नये मरीजों की पहचान हो सके।
7. निरोधात्मक कार्रवाई के तहत लाईन लिस्ट प्राप्त होने पर सूक्ष्म कार्य योजना के अनुसार डेंगू के सम्पुष्ट मरीज के आस-पास 500 मीटर रेडियस में तुरंत टेक्निकल मालाथियोन की फॉगिंग कराएँ।
8. अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में बेड उपलब्ध है। आवश्यकता पड़ने पर सिविल सर्जन इसे बढ़ाएँगे।
9. अस्पतालों में प्लेटलेट्स की उपलब्धता हमेशा सुनिश्चित रखें।
10. विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में हेल्थ एडवायजरी के अनुसार विद्यार्थियों को पूरे शरीर को ढँकने वाले कपड़े/ड्रेस का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करें।
11. सभी भागीदार (स्टेकहोल्डर्स) यथा जिला प्रशासन, नगर निकाय, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, पीएचईडी एवं अन्य आपस में समन्वय स्थापित कर सभी आवश्यक कार्रवाई करें। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी विभागीय दिशा-निदेशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करें। डेंगू बुखार के क्लिनिकल प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशा-निदेशों के अनुरूप प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। आशा/आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा डेंगू-प्रवण क्षेत्र में सघन अभियान चलायें। जनसमुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करें। त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों के जन-प्रतिनिधियों सहित सभी जन-प्रतिनिधियों से अनुरोध कर अभियान में उनका बहुमूल्य सहयोग प्राप्त करें।
12. ज़िला में डेंगू को मात देने के लिए नियमित तौर पर आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) एवं बीसीसी (व्यवहार परिवर्तन संचार) अभियान चलाएँ।