रेडिएंट में ग्रैंड पैरेंट्स डे का आयोजन

पटना. रेडिएंट इंटरनेशनल स्कूल, पटना ने अपने छात्रों में भारतीय संस्कारों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए दिनांक 13/9/ 2024 को ग्रैंड पेरेंट्स डे मनाया, जिसमें बड़ी संख्या में अभिभावक और ग्रैंड पेरेंट्स शामिल हुए। फाउंडेशनल स्टेज के छात्रों के लिए यह कार्यक्रम खुशी, प्यार और यादगार गतिविधियों से भरा हुआ था, जिससे नौनिहालों को अपने दादा- दादी/ नाना-नानी के प्रति अपने स्नेह, प्रशंसा और सम्मान व्यक्त करने का मौका मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई, तत्पश्चात छात्रों द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत ने एक खुशनुमा माहौल बना दिया। विद्यालय की प्राचार्या मनीषा सिन्हा ने सभी अभिभावकों और ग्रैंड पेरेंट्स का स्वागत किया और अपने पोते-पोतियों के जीवन को आकार देने में उनकी अभिन्न भूमिका को उजागर करते हुए कहा कि ग्रैंडपेरेंट्स परिवार में एक विशाल बरगद के वृक्ष की भाँति होते हैं, जिनके पास अनुभव और स्नेह का अपार भंडार होता है, इसलिए अपने छात्रों में ग्रैंड पेरेंट्स के प्रति प्यार और कृतज्ञता दर्शाने के लिए हमारा विद्यालय ग्रैंड पेरेंट्स दिवस मनाता है, ताकि हम अपने नैनिहालों को उस बरगद के वृक्ष की छाया में बैठने और उनके अनुभवों से सीखने का अवसर दें सकें।

उन्होंने बताया कि आज एकल परिवार के बच्चों के पास जानकारियों का खजाना तो है लेकिन जिंदगी जीने की कला नहीं है । ऐसे में यदि उन्हें अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ रहने का अवसर मिल जाए तो बच्चों को उनके साथ अपनी जिज्ञासा शांत करने का अवसर तो मिलेगा ही साथ ही ग्रैंड पेरेंट्स को भी अपने अनुभव सुना कर बच्चों को संस्कारित करने का अवसर मिलने से उन्हें संतोष होगा।

इस अवसर पर खेलों का भी आयोजन किया गया था। जिसमें दादा-दादी को तीन समूहों में विभाजित किया गया ताकि सभी की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके। पहला खेल “म्यूजिकल कैप” था जिसमें पोते-पोतियों को संगीत बंद होते ही अपने दादा-दादी के सिर पर टोपी पहनानी थी। दूसरा खेल “पेपर कप पिरामिड” था जिसमें नौनिहालों को दादा-दादी के सिर पर कप को संतुलित रखते हुए कपों का टॉवर बनाना था। इस खेल में दादा-दादी ने अपने पोते- पोतियों की मदद से सबसे ऊंचा और स्थिर पिरामिड बनाने का प्रयास किया।

अंतिम खेल “बास्केट में बॉल पकड़ना” था, पोते-पोतियों ने छोटे बॉल्स को बास्केट में फेंका जिसे उनके दादा-दादी ने पकड़ा। पीढ़ियों के बीच समन्वय और टीमवर्क ने इस गतिविधि को विशेष रूप से खास बना दिया था, हर बॉल के बास्केट में जाते ही उत्साहपूर्ण गूंज सुनाई दे रही थी।

इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों ने सीखा कि दादा-दादी परिवार का सबसे बड़ा खजाना हैं, वे ऐसे कहानीकार हैं, जो अपने विशेष प्यार और देखभाल के माध्यम से परिवार को दिल के करीब रखते हैं।

फाउंडेशन इंचार्ज श्रीमती पांचाली चटोपाध्याय ने दादा-दादी के प्यार और समर्थन की सराहना करते हुए धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

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