
पटना. भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री विकसित रोजगार योजना (PMVBRY) लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य रोजगार सृजन को बढ़ावा देना, रोजगार क्षमता में वृद्धि करना तथा विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना है। इस योजना में विशेष रूप से विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) एवं श्रम-प्रधान उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह योजना अगस्त 2025 से जुलाई 2027 की अवधि के दौरान देशभर में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार अवसर सृजित करने के लिए तैयार की गई है।
लगभग 99,446 करोड़ के बजटीय प्रावधान के साथ, PMVBRY प्रथम बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों तथा अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं दोनों को प्रोत्साहन प्रदान करती है। योजना के अंतर्गत पात्र प्रथम बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को दो किश्तों में 15,000 तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जबकि नए रोजगार अवसर सृजित करने वाले नियोक्ताओं को भी प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाता है।
इस योजना का उद्देश्य औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देना, श्रमबल की भागीदारी में वृद्धि करना तथा उद्यमों को अपने कार्यबल का विस्तार करने में सहायता प्रदान करना है। इसका क्रियान्वयन श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा किया जा रहा है।
इस अवसर पर हेमन्त कुमार ने बताया कि “रोजगार से विकसित भारत” विषय पर एक उच्च स्तरीय कार्यक्रम 19.06.2026 को केंद्रीय स्तर पर आयोजित किया जाना प्रस्तावित है, जिसमें नवनियुक्त युवाओ एवम नए रोजगार सृजित करने वाले संस्थानों को योजना लाभ का प्रथम किस्त जारी की जायेगी।। इसी के अनुरूप देशभर में क्षेत्रीय स्तर पर भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
हेमन्त कुमार ने आगे कहा कि, “प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना समावेशी विकास एवं नागरिक सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। क्षेत्रीय कार्यालय, पटना के अधिकार क्षेत्र में अब तक 6,000 से अधिक नए रोजगार सृजित हुए हैं तथा इतने ही लाभार्थी इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 500 प्रतिष्ठान भी इस योजना का लाभ प्राप्त करेंगे। विभिन्न हितधारकों के सहयोग एवं समन्वित प्रयासों के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि योजना का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुँचे।”
उन्होंने आगे बताया कि PMVBRY की प्रमुख विशेषताएँ यह है कि देशभर में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार अवसरों का सृजन।
पात्र प्रथम बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के लिए 15,000 तक की वित्तीय सहायता।
अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन।
औपचारिक रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा कवरेज को बढ़ावा।
विनिर्माण एवं श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर विशेष ध्यान।
ईपीएफओ के माध्यम से डिजिटल निगरानी एवं पारदर्शी लाभ वितरण व्यवस्था।
नागरिकों, नियोक्ताओं तथा पात्र लाभार्थियों से आग्रह किया जाता है कि वे योजना के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें तथा निर्धारित पंजीकरण एवं सुविधा तंत्र के माध्यम से इसका लाभ उठाएँ।